📋 तुलना

  • 🔵 इंडेफिनिट (खुला कॉन्ट्रैक्ट): यह तब तक जारी रहता है जब तक कि कोई एक पक्ष इसे समाप्त न करे — इसमें 60 दिनों के नोटिस की आवश्यकता होती है
  • 🟡 फिक्स्ड-टर्म (सीमित अवधि): इसकी एक अंतिम तिथि होती है — यह बिना किसी नोटिस के स्वाभाविक रूप से समाप्त हो जाता है

🔑 अपने आप बदलने (ऑटोमैटिक कन्वर्जन) का नियम

यदि सीमित अवधि (फिक्स्ड-टर्म) का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद भी दोनों पक्ष बिना किसी नए समझौते के काम जारी रखते हैं — तो Article 74 के तहत यह अपने आप इंडेफिनिट (खुले कॉन्ट्रैक्ट) में बदल जाता है। इससे आपको खुले कॉन्ट्रैक्ट के सभी अधिकार मिल जाते हैं।

⚠️ बार-बार रिन्यूअल की चालाकी से सावधान रहें

कुछ कंपनियाँ पूरे अधिकार देने से बचने के लिए फिक्स्ड कॉन्ट्रैक्ट को बार-बार रिन्यू करती हैं। यदि आपका फिक्स्ड कॉन्ट्रैक्ट 2 से अधिक बार रिन्यू हुआ है या कुल अवधि (मूल कॉन्ट्रैक्ट + रिन्यूअल) 4 साल हो गई है — तो कानून इसे इंडेफिनिट (खुला) कॉन्ट्रैक्ट मानता है।

📜 Article 74 — श्रम कानून: यदि दोनों पक्ष सीमित अवधि के अनुबंध की समाप्ति के बाद भी काम जारी रखते हैं, तो इसे अनिश्चित काल (इंडेफिनिट) के लिए नवीनीकृत माना जाएगा।

⚠️ नियोक्ता को अपने फायदे के हिसाब से आपके कॉन्ट्रैक्ट की व्याख्या न करने दें। अपने पास कॉन्ट्रैक्ट की कॉपी और रिन्यूअल की तारीखों का रिकॉर्ड ज़रूर रखें।